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Monday, May 4, 2009

"लखनऊ की महफिलों में हैं शादियाँ लगातार, सड़को पर रहती है ट्रैफिक की भरमार.."

शादी सीजन होने की वजह से चारों तरफ़ शोर शराबा, धूम, धडाका, खुशियाँ है। सब कुछ है लखनऊ की सडको पर लेकिन इसी के साथ यहाँ गाड़ियों की भरमार भी है। जिससे हर तरफ, हर गली में जाम लगातार बना रहता है।
इस जाम के पीछे वजह सिर्फ़ एक है- अवध की शानो शौकत जो पुश्तों दर पुश्तों आज भी हमारी रग-रग में काबिज है। हम नवाबी शहर के बाशिंदे हैं तो भला कहीं ऐसा हो सकता है की हम किसी पार्टी में जाए और बिना साजो सामान के चले जायें। हमारी इसी फितरत की वजह से ही तो चारों ओर गाड़ियों के हार्न चिघाड़ा करते हैं और आम आदमी उसी में मरता रहता है। गाड़ी बड़ी हो या छोटी जल्दी सबको होती है और तो और गाड़ियों में बैठे रहते हैं बस दो या तीन लोग जबकि उसमें आराम से चार पॉँच लोग बैठ सकते हैं।
अब वह समय आ गया है की हमें इस बात का ध्यान कर लेना चाहिए की अवध अब लखनऊ हो गया है और हमें इसके विकास में हर सम्भव प्रयास करना चाहिए, जिसके लिए ट्रैफिक का सुचारू रूप से चलना बहुत जरूरी है। हमें अपने जिंदगी के दो मिनट बचाने के लिए प्राइवेट साधन का इस्तेमाल न करके पब्लिक साधन का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि सड़को पर कम से कम भीड़ हो और ट्रैफिक ठीक से चल सके, जिससे हमारे शहर और देश की प्रगति हो।