Thursday, October 21, 2010

आम आदमी के पैसे पर राजनीति


राष्ट्कुल खेलों की तैयारी और आयोजन के दौरान हुई अनियमितताओं की जांच में पूरा का पूरा सरकारी अमला दोषियों को बचाने में लगा है ऐसा साफ जाहिर हो रहा है ।पूरे प्रकरण ने राजनैतिक रूप ले लिया है इस बात की पुष्टी सिर्फ इसी बात से हो जाती है कि सबसे पहला छापा भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधांशु मित्तल के घर एवं कार्यालय पर मारा गया है। जबकि भारत के बच्चों से भी पुंछा जाय तो वे सुरेश कलमाणी का नाम लेंगे। इस बात की पुष्टी आयोजन के उद्घाटन समारोह में उनके व्यक्तव्य के समय हुई हूटिंग से ही हो गयी थी जो भारत की आम जनता द्वारा की गयी थी।यह वही आम जनता थी जिसके पैसे से ये खेल आयोजित हुआ था।

भारत की जनता बहुत ही आसानी से सबकुछ भूल जाती है,कॉमनवेल्थ गेम्स की चकाचौंध में वह अपने पेट की भूख भी भूल गयी,वह भूल गयी की मंहगाई ने उसकी कमर तोड रखी है।भारत की इस भूलने की प्रकृति के जिम्मेदार कुछ मायने में मीडिया भी है,क्यूँकि वह भी टी आर पी और प्रसार संख्या के भंवर में ऐसा फंसे हैं कि उन्हें आम आदमी की समस्यायें दिखाई ही नहीं देतीं।